एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) दुनिया के सबसे बड़े वास्तविक समय भुगतान मंच के रूप में उभरा है। यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार है। इसके शुभारंभ के एक दशक बाद, यूपीआई वैश्विक तत्काल भुगतान लेनदेन के लगभग आधे हिस्से को संचालित करता है। 11 अप्रैल, 2016 को शुरू किया गया यूपीआई आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार है।
यह वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, निर्बाध व्यापार को सक्षम बनाता है और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में वैश्विक मानक स्थापित करता है। यूपीआई ने पहले महीने में केवल 373 लेनदेन किए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 24 हजार एक सौ 62 करोड़ हो गई।
यूपीआई लेनदेन वित्त वर्ष 2016-17 में सात हजार करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 314 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें लगभग चार हजार गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।
यूपीआई से वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 66 करोड़ लेनदेन किए जा रहे हैं। इनका दैनिक मूल्य लगभग 86 हजार करोड़ रुपये है। अगस्त 2025 में पहली बार मासिक लेनदेन 2 हजार करोड़ रूपये से अधिक हो गई थी। यूपीआई ने मार्च 2026 में 2 हजार 264 करोड़ रूपये के लेनदेन के साथ अब तक का उच्चतम स्तर हासिल किया।
यूपीआई को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने लेनदेन की मात्रा के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय की भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी है।