अप्रैल 18, 2026 8:53 पूर्वाह्न

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लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से नहीं हो सका पारित

लोकसभा में कल संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका। इस विधेयक में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षि‍त रखने का प्रावधान था। लोकसभा में उपस्थित कुल 528 सदस्यों में 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 ने इसके विरोध में मतदान किया, जो दो तिहाई बहुमत से कम था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मतदान का परिणाम घोषित करते हुए कहा कि विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण इसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक सहित अन्य दो विधेयक संविधान (131वां संशोधन) विधेयक से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें पारित करने के लिए पेश नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का अवसर गंवाने का आरोप लगाया।

इससे पहले, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार लोकसभा और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। वे लोकसभा में पेश इन विधेयकों पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। परिसीमन को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि संविधान में परिसीमन का प्रावधान किया गया है और इससे प्रत्‍येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं को उचित प्रतिनिधित्‍व मिल पाएगा। उन्‍होंने कहा कि परिसीमन से अनुसूचित जाति‍ और अनुसूच‍ित जनजाति के लिए सीटों की संख्‍या बढ़ जाएगी। जो सदस्‍य इसका विरोध कर रहे हैं, वे वास्‍तव में इन वर्ग के लोगों की सीटें बढ़ने का अनुरोध कर रहे हैं।

वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक नहीं है और इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विधेयकों को संसद में लाकर चुनावी मानचित्र बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

केन्‍द्रीय मंत्री एचडी कुमार स्‍वामी ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण को किसी के पक्ष में नहीं, बल्कि समाज में उनके योगदान की उचित मान्‍यता के रूप में देखा जाना चाहिए। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा में भाग लेते हुए श्री कुमार स्‍वामी ने कहा कि आज़ादी के करीब 75 वर्ष बाद सरकार ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए उचित आरक्षण देने का ऐतिहासिक कदम उठाया है।

विधेयक का समर्थन करते हुए केन्‍द्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्‍नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में महिलाएं केवल देश की विकास यात्रा में भागीदार ही नहीं हैं बल्कि वे राष्‍ट्र के भविष्‍य को आकार देने में प्रमुख नीति निर्मााता हैं। उन्‍होंने आरोप लगाया है कि विपक्षी सांसदों के प्रयास से 33 प्रतिशत आरक्षण की उम्‍मीद लगा रही करोड़ों महिलाओं की उम्‍मीदें टूट रही हैं।

बहस में भाग लेते हुए डीएमके सांसद के. कनिमोझी ने विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि केंद्र ने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को अब अधिसूचित किया है। सुश्री कनिमोझी ने आरोप लगाया कि सरकार ने तमिलनाडु और अन्य राज्यों में चल रहे चुनावों को बाधित करने के उद्देश्य से इस विशेष सत्र में तीनों विधेयक पेश किए हैं।

कांग्रेस सांसद शशि‍ थरूर ने कहा है कि देश ऐसे मोड़ पर खड़ा जहां महिला आरक्षण के पक्ष में लगभग राजनीतिक सहमति बन चुकी है। उन्‍होंने चिंता व्‍यक्‍त की महिला आरक्षण का कार्यान्‍वयन संसद की सीटें बढ़ने और 2011 की जनगणना तथ परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।