भारतीय रिज़र्व बैंक-आरबीआई ने नियमों, पर्यवेक्षण, भुगतान प्रणालियों और वित्तीय बाजारों को शाामिल करते हुए विकासात्मक और नियामक नीतिगत उपायों की श्रृंखला जारी की है।
आरबीआई ने नियमों के अंतर्गत, सीआरएआर में तिमाही शुद्ध लाभ शामिल करने से संबंधित शर्त को हटाकर बैंकों के लिए मानदंडों को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है। वाणिज्यिक बैंकों के लिए निवेश उतार-चढ़ाव आरक्षित-आईएफआर की आवश्यकता समाप्त करने का भी प्रस्ताव है, जबकि अन्य बैंक श्रेणियों के लिए मानदंडों को संशोधित किया गया है। आरबीआई ने कहा कि दक्षता में सुधार और रणनीति तथा जोखिम प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बैंक बोर्डों के समक्ष रखे गए मामलों की समीक्षा की गई है।
पर्यवेक्षण के संबंध में, आरबीआई ने अनुपालन को सरल बनाने और स्पष्टता बढ़ाने के लिए प्रमुख कार्यात्मक क्षेत्रों में 64 प्रमुख निर्देशों में पर्यवेक्षी निर्देशों को समेकित किया है।
भुगतान प्रणाली खंड में, आरबीआई ने कार्यशील पूंजी तक पहुंच में सुधार और व्यापार करने में आसानी के उद्देश्य से उचित परिश्रम आवश्यकताओं को हटाकर व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली-टीआरईडी पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम-एमएसएमई के प्रवेश को सरल बनाने का प्रस्ताव दिया है।
आरबीआई ने वित्तीय बाजारों में नकदी की उपलब्धता में सुधार करने और मौद्रिक नीति संचरण को मजबूत करने के लिए गैर-बैंकिंग संस्थाओं-एनबीसीएफ और आवास वित्त कंपनियों को अनुमति देकर उधार लेने की सीमा बढ़ाकर सावधि मुद्रा बाजार में भागीदारी का विस्तार करने का निर्णय लिया है।
News On AIR | अप्रैल 8, 2026 8:19 अपराह्न | RBI
सीआरएआर और आईएफआर मानदंडों में बदलाव, बैंकों के लिए राहत