सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे का खंडन किया है, जिसमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के नाम पर ऋण स्वीकृति पत्र दिखाया जा रहा है। इस वीडियो में साढे़ तीन सौ रुपये प्रोसेसिंग शुल्क के भुगतान पर 5 लाख रुपये का ऋण देने का झूठा वादा किया जा रहा है। पत्र सूचना कार्यालय की तथ्य जांच इकाई ने कहा है कि यह वीडियो फर्जी है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाया गया है।
कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुद्रा योजना व्यक्तियों या सूक्ष्म उद्यमियों को सीधे ऋण प्रदान नहीं करती है। सरकार ने ऐसी फर्जी खबरों से सावधान रहने का आग्रह किया है और लोगों को परामर्श दिया गया है कि वे ऐसे संदेशों के आधार पर धन हस्तांतरण न करें और न ही व्यक्तिगत तथा बैंकिंग जानकारी साझा करें।