राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिवों को पत्र जारी कर देश में लू के दौरान कमजोर वर्ग की सुरक्षा के लिए अग्रिम कार्रवाई करने और राहत उपायों को लागू करने हेतु निर्देश दिए हैं। आयोग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार लू के प्रभाव को कम करने और जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने कहा कि लू की आवृत्ति, अवधि और तीव्रता में वृद्धि से हाशिए पर रहने वाले, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, बाहरी कामगार और बेघर लोग पर्याप्त आश्रय और संसाधनों की कमी के कारण प्रभावित होते हैं। आयोग ने कहा कि बुजुर्ग, बच्चे और नवजात शिशु अत्यधिक गर्मी के स्वास्थ्य प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं और लू से आजीविका का नुकसान हो सकता है तथा आग लगने की दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए आयोग ने एकीकृत और समावेशी उपायों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। इन आंकड़ों के अनुसार 2019 से 2023 के बीच भारत में लू लगने से 3,712 से अधिक लोगों की मौत हुई।