भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आज प्रख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर की विरासत को याद करते हुए आयोजित आठवें स्मृति व्याख्यान को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय चेतना को आकार देने में साहित्य के चिरस्थायी महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि साहित्य और कविता ने प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक समाज के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि दिनकर की रचनाएं सामूहिक चेतना को जागृत करके और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देकर सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित करती रहती हैं। दिनकर की प्रसिद्ध रचना रश्मिरथी का उल्लेख करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह कर्ण के चरित्र के माध्यम से समानता, न्याय और व्यक्तिगत योग्यता पर सशक्त विचार प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि ऐसी साहित्यिक रचनाएँ समानता, गरिमा और न्याय के संवैधानिक मूल्यों के साथ गहराई से मेल खाती हैं।