पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रधानाचार्य संदीप घोष के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय को मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आधिकारिक आदेश जारी कर निदेशालय को घोष के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।
श्री अधिकारी ने कहा कि पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस मामले की जांच प्रक्रिया को लंबे समय तक जबरन और अनैतिक रूप से रोक रखा था। आधिकारिक आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन रवि, ने सक्षम प्राधिकारी के रूप में एफआईआर, मामले के रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच के बाद माना कि कोलकाता स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के तत्कालीन प्रधानाचार्य संदीप घोष पर कानून की अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
यह मामला एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या से भी संबंधित है, जिसका शव पिछले वर्ष 9 अगस्त को अस्पताल के सेमिनार कक्ष में मिला था। इसी बीच, 29 नवंबर, 2025 को सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में आरोप पत्र दाखिल किया गया था। आरोप पत्र में संदीप घोष और डॉ. आशीष कुमार पांडे, बिप्लब सिंघा, सुमन हजरा और अफसर अली खान सहित अन्य लोगों को वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्तता के लिए नामजद किया गया था। यह जांच कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शुरू की गई थी।
भ्रष्टाचार मामले के अलावा, संदीप घोष से हत्या मामले के संबंध में भी पूछताछ की गई। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के अंतर्गत उनका पॉलीग्राफ परीक्षण किया। इसके बाद, पश्चिम बंगाल की सियालदह अदालत ने तला पुलिस स्टेशन के पूर्व प्रभारी अधिकारी अभिजीत मंडल और संदीप घोष को जमानत दे दी गई थी। यह जमानत इसलिए दी गई क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो कानून के अंतर्गत निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने में विफल रही थी।