आज देश, ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मना रहा है। पिछले वर्ष 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के नौ ठिकानों पर हवाई हमले किए गए थे। इन हमलों में कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए थे। यह कार्रवाई पिछले वर्ष 22 अप्रैल को पहलगाम में पर्यटकों पर हुए पाकिस्तान प्रायोजित बर्बर आतंकवादी हमले का भारत की ओर से करारा जवाब थी। आज हम सरकार की आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति पर बात करेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य और रणनीतिक शक्ति का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन था, जिसे सैन्य और गैर-सैन्य साधनों के संयोजन से अंजाम दिया गया। इस बहुआयामी अभियान ने आतंकवादी खतरों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर दिया, पाकिस्तानी आक्रामकता को रोका और आतंकवाद के प्रति भारत की शून्य-सहिष्णुता नीति को दृढ़ता से लागू किया। इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करते हुए रणनीतिक संयम बनाए रखा।
इस अभियान का उद्देश्य आतंकवाद के अपराधियों और योजनाकारों को दंडित करना और सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट करना था। अभियान के दौरान, भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकी परिदृश्य का गहन विश्लेषण किया और कई आतंकी शिविरों और प्रशिक्षण स्थलों की पहचान की। इस अभियान के परिणामस्वरूप नौ प्रमुख आतंकी शिविरों का विनाश, 11 पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर हमला और कई प्रमुख आतंकवादियों का खात्मा हुआ। हमले भीषण थे, लेकिन भारत ने उन्हें नैतिक मूल्यों और संयम के साथ अंजाम दिया, केवल आतंकवादी ठिकानों को ही निशाना बनाया और नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया।
इस भारी क्षति से आहत होकर पाकिस्तान को युद्धविराम का सहारा लेने के लिए विवश होना पड़ा। नई दिल्ली ने न केवल इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, बल्कि इसने भारतीय वायु सेना, भारतीय सेना और भारतीय नौसेना – तीनों बलों के बीच समन्वित कार्रवाई और अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन भी किया। इसने उन्नत रक्षा प्रणालियों के निर्यात में भारत की बढ़ती क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया। ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख का मुख्य उदाहरण और उसकी विनाशकारी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है।