शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश में एक मजबूत अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है। नई दिल्ली में आज आईआईटी मद्रास तकनीकी शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए, श्री प्रधान ने नवाचार-संचालित परिणाम देने के लिए भारत के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान केवल पीएचडी शोध प्रबंधों और अकादमिक प्रकाशनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे ऐसे ठोस नवाचार होने चाहिए जिनसे समाज को लाभ हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने विभिन्न पहलों के माध्यम से उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को सहयोग देने के लिए अनुसंधान और विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
श्री प्रधान ने कहा कि भारत एक उभरते हुए नवाचार केंद्र के रूप में सामने आया है, जहां हाल के वर्षों में स्टार्टअप की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि कई सफल स्टार्टअप और यूनिकॉर्न शैक्षणिक परिसरों से उभर रहे हैं। वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए, श्री प्रधान ने कहा कि देश ने अपनी रैंकिंग में 81वें स्थान से 38वें स्थान तक सुधार किया है, जो अग्रणी अनुसंधान में इसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।