जुलाई 27, 2025 1:47 अपराह्न

printer

मन की बात में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- 21वीं सदी के भारत में विज्ञान नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि 21वीं सदी के भारत में विज्ञान नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। आज आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में, उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित वापसी से देश गर्व से भर गया। श्री मोदी ने कहा कि अगस्त-2023 में चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से देश में एक नया माहौल बना, और बच्चों में विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञानी बनने की जिज्ञासा जगी थी।
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शुरु किए गए एन्सपायर-मानक अभियान के तहत हर स्कूल से पांच बच्चे चुने जाते हैं और प्रत्येक बच्चा एक नया आइडिया लेकर आता है। श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि अब तक लाखों बच्चे इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि पांच साल पहले, देश में अंतरिक्ष से जुड़े 50 से भी कम स्टार्ट-अप थे जो आज दो सौ से ज़्यादा हो गए हैं।
 
 
 
आगामी 23 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने श्रोताओं से अपील की कि वे नमो ऐप के ज़रिए नया आइडिया साझा करें कि यह दिवस कैसे मनाया जाए।
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कुछ ही दिन पहले, अंतरराष्ट्रीय रसायन-शास्त्र ओलंपियाड में पदक जीतने वाले छात्रों की चर्चा की जिन्होंने भारत का नाम रोशन किया है। ये छात्र हैं- देवेश पंकज, संदीप कुची, देवदत्त प्रियदर्शी और उज्ज्वल केसरी। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने गणित के क्षेत्र में भी अपनी पहचान को मज़बूत किया है। ऑस्ट्रेलिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में, भारत के विद्यार्थियों ने 3 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक हासिल किया है।
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने बताया कि अगले महीने मुंबई में, खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी ओलिंपियाड का आयोजन होगा। यह अब तक का सबसे बड़ा ओलिंपियाड होगा जिसमें 60 से अधिक देशों के छात्र आएंगे और भारत अब ओलिंपिक और ओलिंपियाड–दोनों के लिए आगे बढ़ रहा है।
 
 
 
प्रधानमंत्री ने गर्व व्यक्त किया कि यूनेस्को ने 12 मराठा किलों को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। इनमें से 11 किले महाराष्ट्र में हैं और 1 किला तमिलनाडु में है। श्री मोदी ने कहा कि इनमें से हर किले से इतिहास का एक-एक पन्ना जुड़ा हुआ है। सल्हेर किले में मुगलों की हार हुई थी, जबकि शिवनेरी किले में छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था।
 
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अन्य जगहों पर भी ऐसे अद्भुत किले हैं जिन्होंने आक्रमण झेले, खराब मौसम की मार झेली लेकिन आत्म-सम्मान को कभी झुकने नहीं दिया। उन्होंने चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, आमेर, जैसलमेर, गुलबर्गा और चित्रदुर्ग किले की खासतौर से चर्चा की। श्री मोदी ने कहा कि महमूद गज़नवी ने उत्तरप्रदेश के बांदा स्थित कालिंजर किले पर कई बार हमले किए, लेकिन हर बार असफल रहा।
 
 
 
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बुंदेलखंड-ग्वालियर, झांसी, दतिया, अजयगढ़, गढकुंडार और चंदेरी के कई किले सिर्फ ईंट-पत्थर  नहीं हैं, ये हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं। श्री मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे इन किलों की यात्रा करें और अपने इतिहास को जानें।
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगस्त का महीना क्रांति का महीना है। उन्होंने 18 वर्ष के क्रांतिकारी खुदीराम बोस के साहस की प्रशंसा की जो 11 अगस्त,1908 को हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। बिहार के मुज़फ़्फरपुर की जेल में जब उन्हें अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ अपना देश-प्रेम व्यक्त करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही थी, उस समय लोगों ने जेल को घेर रखा था और उनकी आंखों में आंसू थे। श्री मोदी ने कहा कि देश के दीवानों ने अपने रक्त से आज़ादी के आंदोलन को सींचा था और  अनगिनत बलिदानों के बाद देश को आज़ादी मिली थी।
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पहली अगस्त को मनाई जाएगी। अगस्त महीने की ही 8 तारीख़ को महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन शुरु हुआ था। श्री मोदी ने कहा कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आज़ादी के साथ बंटवारे की टीस भी जुड़ी हुई है। इसलिए, 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
 
 
 
प्रधानमंत्री ने स्वदेशी आंदोलन की चर्चा की जो 7 अगस्त,1905 को शुरु हुआ था। इस आंदोलन ने स्थानीय उत्पादों और ख़ासकर हथकरघा क्षेत्र को नई ऊर्जा दी थी। इसी  स्मृति में, हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस  मनाया जाता है। श्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के 10 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कपड़ा क्षेत्र देश की ताक़त बन रहा है। पिछले दशकों में, देश के अलग-अलग हिस्सों से इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों ने सफलता की गाथाएं लिखी है। 
 
 
 
श्री मोदी ने महाराष्ट्र के पैठण गांव की कविता धवले की चर्चा की जो सरकार की मदद से अब खुद की बनाई पैठणी साड़ियां बेच रही हैं। प्रधानमंत्री ने खुशी ज़ाहिर की कि ओडिशा के मयूरभंज की साढे छह सौ से अधिक जनजातीय महिलाओं ने संथाली साड़ी को फिर से जीवित कर दिया है और हर महीने हज़ारों रूपए कमा रही हैं। ये महिलाएं सिर्फ कपड़ा नहीं बना रही, बल्कि अपनी पहचान गढ़ रही हैं।
 
 
 
श्री मोदी ने बिहार के नालंदा के नवीन कुमार की उपलब्धि की चर्चा की जिनका परिवार पीढ़ियों से इस काम से जुड़ा है और अब उनके बच्चे हथकरघा प्रौद्योगिकी की पढ़ाई कर रहे हैं।
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र भारत के लिए केवल एक आर्थिक क्षेत्र मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विविधता की मिसाल है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ग्रामीण महिलाएं, शहरी डिजाइनर, बुजुर्ग बुनकर और युवाओं के समेकित प्रयास से कपड़ा और परिधान क्षेत्र को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय देश में तीन हज़ार से अधिक कपड़ा स्टार्ट-अप सक्रिय हैं जो भारत की हथकरघा पहचान को वैश्विक ऊंचाई दे रहे हैं।
 
 
 
श्री मोदी ने कहा कि 2047 के विकसित भारत का रास्ता आत्म-निर्भरता से होकर गुज़रता है और आत्मनिर्भरता भारत की नींव तभी मज़बूत होगी जब हम वही खरीदें और बेचें जिसे बनाने में किसी भारतीय का पसीना बहा हो।
 
 
 
 
मन की बात में प्रधानमंत्री ने लोकगीत और परम्‍पराओं की विविधताओं पर भी बात की। उन्‍होंने ओडिशा की क्‍योंझर की राधा-कृष्‍ण संकीर्तन मंडली की चर्चा की जो कीर्तन के ज़रिए वन-क्षेत्र में आग के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है। इस पहल की प्रेरणा हैं प्रमिला प्रधान जो जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए पारंपरिक गीतों में नए बोल और संदेश जोड़ रही हैं। 
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि त्‍योहार और परम्‍पराएं भारतीय संस्‍कृति का एक बड़ा आधार हैं। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान और इतिहास का दस्‍तावेजीकरण करना ज़रूरी है। श्री मोदी ने कहा कि भारत की असली ताकत वह ज्ञान है, जिसे सदियों से पांडुलिपियों के रूप में सहेजा गया है। इन पांडुलिपियों में विज्ञान, चिकित्‍सा-पद्धति, संगीत और दर्शन के बारे में जानकारियां हैं।
 
 
 
 
उन्होंने कहा कि ऐसे असाधारण ज्ञान और विरासत को सहेजना प्रत्‍येक नागरिक की जिम्‍मेदारी है। उन्‍होंने तमिलनाडु में तंजावुर के मणि मारन का जिक्र किया, जिन्‍होंने छात्रों, युवाओं और शोधकर्ताओं के लिए तमिल पांडुलिपि पढ़ना सीखने की कक्षाएं शुरु की हैं। मणि मारन ने ‘तमिल सुवादियियाल’ ग्रंथ को समझने और पढ़ने का तरीका लोगों को सिखाया है।
 
 
 
 
यह पांडुलिपि ताड़-पत्र पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर ऐसे प्रयास पूरे देश में किए जाएं, तो पुरातन ज्ञान नई पीढ़ी की चेतना का हिस्‍सा बन जाएगा। इससे प्रेरित होकर सरकार ने इस वर्ष बजट में ज्ञान भारतम् मिशन की घोषणा की है। इसमें प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटीकरण किया जाएगा।
 
 
 
 
एक राष्‍ट्रीय डिजिटल भंडागार सृजित होगा, जहां दुनियाभर के विद्यार्थी और शोधकर्ता भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ सकेंगे। प्रधानमंत्री ने ऐसे प्रयासों में सहयोग के लिए संस्‍कृति मंत्रालय या माई गॉव से जुड़ने की अपील की। 
 
 
 
 
श्री मोदी ने घास के मैदान और उनमें रहने वाले पक्षियों की गणना की ओर ध्‍यान आकर्षित किया। यह कार्य पहली बार असम के काजीरंगा राष्‍ट्रीय उद्यान में किया जा रहा है। इसकी वजह से पक्षियों की 40 से ज़्यादा प्रजातियों की पहचान हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञ दल पक्षियों की आवाज़ रिकार्ड कर कम्‍प्‍यूटर पर इसका विश्‍लेषण करता है। उन्‍होंने इसकी सराहना करते हुए कहा कि भारत की जैव-विविधता की पहचान  के लिए ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए।
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने झारखंड के गुमला जिले के ओमप्रकाश साहू का जिक्र किया, जिन्‍होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर मछली पालन शुरू किया। उन्‍होंने कहा कि एक समय इस क्षेत्र को माओवादी हिंसा के लिए जाना जाता था। श्री मोदी ने कहा कि शुरू में ओम प्रकाश साहू को धमकियां मिली, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ। प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य-संपदा योजना के तहत उन्‍हें सरकार से प्रशिक्षण मिला। श्री मोदी प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि गुमला में मत्‍स्‍य क्रांति शुरू हुई और बासिया ब्‍लॉक के डेढ़ सौ से अधिक परिवार मछली-पालन से जुड़ चुके हैं। उन्‍होंने कहा कि बहुत से लोग जो पहले नक्‍सल संगठन से जुड़े थे, अब दूसरों को रोजगार दे रहे हैं। 
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत ने अमरीका में हुए वर्ल्‍ड पुलिस और फायर गेम्‍स में लगभग छह सौ पदक जीतकर इतिहास रचा है। इस प्रतियोगिता में विश्‍वभर के पुलिसकर्मियों, दमकल कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों ने भाग लिया था और  भारत, 71 में से शीर्ष तीन देशों में शामिल रहा। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2029 में इन खेलों का आयोजन भारत में किया जाएगा।  
 
 
 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों उन्‍हें कई युवा एथलीटों और उनके माता-पिता से संदेश मिले हैं। इन संदेशों में खेलो भारत नीति की बहुत सराहना की गई है। इस नीति का उद्देश्‍य भारत को खेल-कूद में एक महाशक्ति बनाना है। श्री मोदी ने कहा कि गांव, गरीब और बेटियां इस नीति की प्राथमिकता हैं।
 
 
 
प्रधानमंत्री ने संतोष व्‍यक्‍त किया कि स्‍वच्‍छ भारत मिशन जल्‍द ही 11 वर्ष पूरे कर लेगा। उन्‍होंने कहा कि यह मिशन एक जन आंदोलन बन गया है। श्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष के स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण में साढ़े चार हजार से ज्‍यादा शहर और कस्‍बे जुड़े। उन्‍होंने पहाड़ों में कचरा प्रबंधन की नई मिसाल कायम करने के लिए उत्‍तराखंड में कीर्तिनगर के लोगों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने बताया कि मैंगलूरू में प्रौद्योगिकी की सहायता से जैविक कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है।
 
 
 
श्री मोदी ने अरूणाचल प्रदेश के रोइंग शहर में लिए गए ग्रीन रोइंग इनिशिएटिव का उल्‍लेख किया। इसके तहत रिसाइकल्‍ड कचरे से एक पूरा पार्क बना दिया गया है। उन्‍होंने कहा कि कराड़, विजयवाड़ा में जल प्रबंधन के कई नए उदाहरण बने हैं। श्री मोदी ने बताया कि अहमदाबाद में रिवर फ्रंट पर सफाई ने भी सबका ध्‍यान खींचा हैं। 
     
 
 
प्रधानमंत्री ने भोपाल की सकारात्‍मक सोच टीम की सराहना की जिसमें दो सौ महिलाएं हैं। यह टीम शहर के 17 पार्कों की सफाई करती हैं और कपड़े के थैले बांटती हैं। उन्‍होंने लखनऊ की गोमती नदी टीम का भी जिक्र भी किया जिसके सदस्‍य पिछले दस साल से हर रविवार को स्‍वच्‍छता का काम करते हैं। श्री मोदी ने छत्‍तीसगढ़ के बिल्‍हा का उदाहरण भी दिया, जहां महिलाओं को कचरा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। उन्‍होंने गोवा के पणजी का जिक्र किया, जहां कचरे को 16 श्रेणियों में बांटा गया है। 
 
 
 
प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाली तीज के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्‍होंने कहा कि सावन की फुहारों के बीच देश एक बार फिर त्‍यौहारों की रौनक से सजने जा रहा है। श्री मोदी ने कहा कि आगामी नागपंचमी, रक्षाबंधन और जन्‍माष्‍टमी त्‍यौहार हमारी भावनाओं से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को इन पावन पर्वों की शुभकामनाएं दीं।