महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें आशा, गरिमा और सामाजिक न्याय का वैश्विक प्रतीक बताया। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा अन्य मंत्रियों ने मुंबई के दादर क्षेत्र में स्थित डॉ. आम्बेडकर स्मारक, चैत्यभूमि का दौरा किया। इस अवसर पर डॉ. आम्बेडकर को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए।
चैत्यभूमि में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि डॉ. आम्बेडकर ने एक मजबूत संवैधानिक नींव रखी, जिसने भारत को जीवंत लोकतंत्र के रूप में स्थापित किया। उन्होंने संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में आम्बेडकर की भूमिका को भी याद किया, जिसमें मौलिक अधिकारों की गारंटी, अस्पृश्यता का उन्मूलन और अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए सकारात्मक कार्रवाई के प्रावधान शामिल थे। उन्होंने कहा कि डॉ. आम्बेडकर लैंगिक समानता के प्रबल समर्थक थे, जिससे देश में समान अधिकार और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सुनिश्चित हुआ।
चैत्यभूमि में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि डॉ. आम्बेडकर ने दिखाया कि कैसे ‘एक व्यक्ति, एक कलम और एक किताब’ संविधान के माध्यम से एक राष्ट्र का रूपांतरित कर सकती है। उन्होंने कहा कि डॉ. आम्बेडकर ने सामाजिक सुधार के साथ आर्थिक चिंतन भी दिया। उन्होंने मौद्रिक नीति और भारतीय रुपये पर कार्य किया, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना को बल मिला। श्री फडणवीस ने कहा कि क्रय शक्ति और आर्थिक सुधार पर डॉ. आम्बेडकर के विचार आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में आज भी प्रासंगिक हैं। इस अवसर पर बृहन्मुंबई नगर निगम ने वृक्षारोपण और रक्तदान अभियान का आयोजन किया।