मई 12, 2026 11:57 पूर्वाह्न

printer

विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने यूएन में गणित और विज्ञान पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गणित और विज्ञान के बारे में एकपक्षीय दृष्टिकोण से आगे बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने इतिहास के लोकतांत्रिकरण पर आधारित ऐसी सोच की आवश्यकता बताई जो इन क्षेत्रों में भारत के मौलिक योगदानों को मान्यता दे। डॉ. जयशंकर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गणित में भारत के योगदान से जुड़ी प्रदर्शनी का उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने तीसरी सदी में भारत में विकसित बाइनरी प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि यह डिजिटल युग की नींव है और इसी के आधार पर विश्व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी इस बात का प्रतीक है कि गणित एक सार्वभौमिक भाषा है और इसके प्रसार ने वैश्विक हित से जुड़े मुद्दों में योगदान दिया है।

विदेश मंत्री ने कहा कि इस वर्ष फरवरी में भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट सम्मेलन ने एक मजबूत संदेश दिया है रचनात्मकता और नवाचार केवल कुछ ही देशों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी सभी तक सुलभ होने की प्रशंसा की जानी चाहिए। साथ ही, विश्व के लोकतांत्रिकरण के लिए इतिहास के लोकतांत्रिकरण की जरूरत है।

इस प्रदर्शनी को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के संहिता कार्यक्रम के अंतर्गत तैयार किया गया। इसके अंतर्गत चिकित्सा, गणित, दर्शनशास्त्र और साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय ज्ञान परंपरा को उजागर करना है।