मार्च 10, 2026 9:41 अपराह्न | Cabinet approves changes in FDI guidelines

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मंत्रिमंडल ने भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश संबंधी एफडीआई दिशानिर्देशों में बदलाव को मंजूरी दी

मंत्रिमंडल ने आज भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से निवेश संबंधी दिशानिर्देशों में बदलाव को मंजूरी दी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश-एफडीआई नीति में संशोधन का उद्देश्य स्टार्टअप और डीप टेक कंपनियों के लिए वैश्विक निवेश निधियों से अधिक एफडीआई प्रवाह को बढ़ावा देना और व्यापार करने में सुगमता को आगे बढ़ाना है। इससे पहले कोविड महामारी के कारण सरकार ने 17 अप्रैल 2020 को प्रेस नोट-3 जारी कर एफडीआई नीति में संशोधन किया था। इससे महामारी के चलते भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहणों पर अंकुश लगाया जा सका। सरकार ने आज एफडीआई नीति में उन बदलावों को मंजूरी दे दी है जिनमें पीएन3 के अंतर्गत अनुमोदन की आवश्यकता वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश के लिए एक निश्चित समयसीमा निर्धारित की गई है।
60 दिनों के भीतर त्वरित निर्णय से कंपनियों को भारत में विनिर्माण विस्तार के लिए सहयोग करने में मदद मिलेगी। 60 दिनों की निर्णय/अनुमोदन समयसीमा कंपनियों को संयुक्त उद्यम स्थापित करने, प्रौद्योगिकियों तक पहुंच बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत होने में मदद करेगी।
यह उम्मीद की जाती है कि नए दिशानिर्देश भारत में व्यापार करने में स्पष्टता और सुगमता प्रदान करेंगे और निवेश को बढ़ावा देंगे। इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़ोतरी, नई प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, घरेलू मूल्यवर्धन, घरेलू कंपनियों के विस्तार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ एकीकरण में योगदान मिलेगा। इससे भारत एक पसंदीदा निवेश और विनिर्माण गंतव्य बनेगा। बढ़े हुए एफडीआई से घरेलू पूंजी को बढ़ावा मिलेगा, आत्मनिर्भर भारत को समर्थन मिलेगा और समग्र आर्थिक विकास में तेजी आएगी।

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