प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी. के. मिश्रा ने कहा है कि सरकार अंतरिक्ष की ही तरह परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को भी खोलने की योजना बना रही है। कल मुंबई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र प्रशिक्षण स्कूल में उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा कर, कम लागत पर धन उपलब्ध कराकर तथा निजी क्षेत्र की क्षमताओं का उपयोग कर परमाणु ऊर्जा के शुल्क में कमी लाई जा सकती है और परमाणु परियोजनाएं आर्थिक रूप से व्यावहारिक बन सकती हैं।
श्री मिश्रा ने परमाणु ऊर्जा को भारत में बिजली का मुख्य स्रोत बनाने के लिए अनुसंधानकर्ताओं से नवाचार की अपील की ताकि इसकी लागत कम हो सके।
श्री मिश्रा ने कहा कि अंतरिक्ष की ही तरह परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को भी निजी क्षेत्र के लिए खोलने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के सामाजिक प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि रेडियो आइसोटॉप का उपयोग कैंसर के इलाज के लिए और विकिरण तकनीक का उपयोग अपशिष्ट जलशोधन तथा कृषि भंडारण के लिए किया जा सकता है।
श्री मिश्रा ने कहा कि 2024-25 के केंद्रीय बजट में भारत लघु मॉड्युलर रिएक्टर और उन्नत परमाणु तकनीकों के लिए अनुसंधान और विकास तथा वर्ष 2047 तक परमाणु क्षमता का सौ गीगावाट तक विस्तार करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी लेने की घोषणा की गई थी।