प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि विदेशों पर भारत की निर्भरता उसके सबसे बड़े दुश्मनों में से एक है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देश 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए विश्व के सामने एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में खड़ा हो।
प्रधानमंत्री आज भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। भारत को एक समुद्री महाशक्ति बनाने के अपनी सरकार के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का लक्ष्य 2047 तक वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी हिस्सेदारी को तीन गुना करना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश को आत्मनिर्भर बनना होगा।
उन्होंने आगाह किया कि दूसरों पर निर्भरता राष्ट्रीय स्वाभिमान के साथ समझौता है। श्री मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का भविष्य बाहरी ताकतों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, न ही राष्ट्रीय विकास का संकल्प विदेशी निर्भरता पर आधारित हो सकता है। उन्होंने कहा की कि सौ समस्याओं का एक ही समाधान है – आत्मनिर्भर भारत का निर्माण। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश को चुनौतियों का सामना करना होगा, विदेशों पर निर्भरता कम करनी होगी और सच्ची आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन करना होगा।
इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। श्री मोदी ने 7 हजार आठ सौ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की कई प्रमुख समुद्री परियोजनाओं के साथ-साथ मुंबई अंतर्राष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल का भी उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश अब अपनी विरासत को पुनः प्राप्त करने और एक वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में उभरने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।
भारत के तट हमेशा से समृद्धि के प्रतीक रहे हैं और अब इसके समुद्री तट भारत के भविष्य के विकास के प्रवेश द्वार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र अगली पीढ़ी के सुधारों के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने घोषणा की कि यह क्षेत्र जल्द ही “एक राष्ट्र, एक बंदरगाह प्रक्रिया” को अपनाएगा, जिसका उद्देश्य पूरे देश में बंदरगाह प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। उन्होंने संसद में हाल ही में पारित हुए पाँच समुद्री-संबंधी विधेयकों को एक “गेमचेंजर” बताया जो बंदरगाह प्रशासन का आधुनिकीकरण करेगा।
उन्होंने समुद्री क्षेत्र को कमजोर करने के लिए पिछली सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि लाइसेंस राज प्रणाली और वैश्वीकरण के बाद की नीतियों के कारण विदेशों पर निर्भरता बढ़ी है।