केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज कहा कि अमेरिका से पवित्र पुरातन वस्तुओं की वापसी भारत की सभ्यतागत स्मृति की पुनर्स्थापना का प्रतीक है और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्प्राप्ति और संरक्षण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
नई दिल्ली में इन प्राचीन वस्तुओं की ऐतिहासिक वापसी के संबंध में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री शेखावत ने कहा कि यह प्रयास संग्रहालयों में नैतिक प्रथाओं को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संस्कृति मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि कांस्य कलाकृतियों में लगभग 990 ईस्वी की चोल काल की शिव नटराज प्रतिमा, 12वीं शताब्दी की सोमस्कंद प्रतिमा और विजयनगर काल की 16वीं शताब्दी की संत सुंदरार और परवई की प्रतिमा शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि ये वस्तुएं कथित तौर पर 1950 के दशक के आरंभ में तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराई गई थीं।
श्री शेखावत ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि देश की विरासत, जिसे अनैतिक तरीकों से देश से बाहर ले जाया गया था, अब वापस लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत की विरासत और पुरातन वस्तुओं के संरक्षण की दिशा में सरकार ने ऑस्ट्रेलिया से ग्यारह और अमरीका से तीन मूर्तियाँ सफलतापूर्वक मंगवाई हैं। श्री शेखावत ने कहा कि इनके अतिरिक्त सरकार ने 657 अन्य पुरातन वस्तुओं की भी पहचान की है। श्री शेखावत ने बताया कि अमरीका के साथ बातचीत के बाद प्रवर्तन एजेंसियों ने इन कलाकृतियों को अमरीका के भारतीय दूतावास को सौंप दिया है।