यमन के ईरान समर्थित हौसी विद्रोहियों ने इज़राइल पर तीसरे मिसाइल हमले की ज़िम्मेदारी ली है। यह ईरान-इज़राइल संघर्ष के विस्तार का संकेत देता है और पश्चिम एशिया में एक और सक्रिय मोर्चे की आशंका को बढ़ाता है।
हौसी के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने एक टेलीविज़न बयान में कहा कि इस समूह ने अपना तीसरा सैन्य अभियान चलाया, जिसमें उन्होंने दुश्मन इज़राइल के ठिकानों पर सिलसिलेवार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी। उन्होंने कहा कि यह हमला ईरान और लेबनान के हिज़्बुल्लाह के समन्वय से किया गया था। हौसी के सैन्य प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि सभी प्रतिरोध मोर्चों पर हमले बंद होने तक अभियान जारी रहेंगे।
उधर, इज़राइल के अधिकारियों ने कहा कि वायु रक्षा प्रणालियों ने आने वाले हमलों को रोक दिया, और तत्काल किसी के हताहत होने या नुकसान की कोई खबर नहीं है। एलाट और नेगेव रेगिस्तान के कुछ हिस्से सहित दक्षिणी इज़राइल के क्षेत्रों में हवाई हमले के सायरन बजने की सूचना मिली।
यह ताजा हमला मार्च के अंत से हौसी विद्रोहियों द्वारा किए गए पहले के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद हुआ है। यह बढ़ते क्षेत्रीय संघर्ष में समूह की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। इस घटनाक्रम से इज़राइल के लिए और दबाव बढ गया है। हौसी गुट को अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है। यह गुट राजधानी सना सहित यमन के उत्तरी भाग के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। इस गुट ने पहले भी इज़राइल पर लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं और लाल सागर और अदन की खाड़ी में समुद्री मार्गों को निशाना बनाया है।
यमन के पश्चिमी तट पर उनका नियंत्रण उन्हें रणनीतिक बाब अल मंडेब जल-डमरू-मध्य से यातायात को बाधित करने की क्षमता देता है। इन नए हमलों ने समुद्री व्यापार में व्यवधान और पश्चिम एशिया में और अधिक तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है, क्योंकि ईरान समर्थित समूह समन्वय बढ़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। ताजा हमले से हुए नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई है और स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।