अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि यह दिव्यांगजनों के साहस, आत्मविश्वास और उपलब्धियों के आगे नतमस्तक विशेष अवसर है। एक लेख में श्री मोदी ने कहा कि दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान भारत की विचारधारा में निहित है।
रामायण के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय धर्मग्रंथों और लोकग्रंथों में दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान की भावना देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश में दिव्यांगजन उत्साह के साथ देश के सम्मान और स्वाभिमान की ऊर्जा बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने दिव्यांगजनों की प्रगति के लिए एक मजबूत नींव रखी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संबंध में कई नीतियां बनाई गई हैं और कई निर्णय लिए गए हैं।
श्री मोदी ने कहा कि नौ वर्ष पहले आज ही के दिन सरकार ने सुगम्य भारत अभियान शुरू किया था और जिस तरह से इस अभियान ने दिव्यांगजनों को सशक्त बनाया है, उससे उन्हें बहुत संतोष मिला है। उन्होंने कहा कि 10 साल में दिव्यांगजनों के कल्याण पर खर्च होने वाली राशि तीन गुना बढ़ाई गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दिव्यांगजन समर्पित भागीदार बनकर देश को गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने दिव्यांगजन अधिनियम लागू किया और इस ऐतिहासिक कानून में दिव्यांगता की परिभाषा की श्रेणी को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया। एसिड हमले की पीडितों को भी पहली बार इसमें शामिल किया गया।
श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा हो, खेल हो या स्टार्टअप, दिव्यांगजन सभी बाधाओं को तोड़कर नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं और देश के विकास में भागीदार बन रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2047 में जब देश स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तो दिव्यांगजनों को पूरी दुनिया में प्रेरणा के रूप में देखा जाएगा।
उन्होंने सभी से ऐसे समाज का निर्माण करने का आह्वान किया, जहां कोई सपना और लक्ष्य असंभव न हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा करने पर ही हम सही मायने में समावेशी और विकसित भारत का निर्माण कर पाएंगे।