राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-आर.एस.एस प्रमुख डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा है कि संघ को समझने के लिए उसे भीतर से देखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संघ देश के लिए काम करता है और उसे न तो सत्ता चाहिए, न लोकप्रियता, न ही अधिकार, न ही उसे किसी तरह की प्रसिद्धि की आकांक्षा है। दो दिन के पंजाब दौरे पर पहुंचे डॉ. भागवत ने कल पठानकोट में सेवा मुक्त सेना अधिकारी गोष्ठी को संबोधित किया। उन्होंने सभी रैंकों के सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों से बातचीत की।
डॉ. भागवत ने कहा कि भारतीय सेना विविधता में एकता का एक महान उदाहरण है और इसी भावना को समाज में भी मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशहित के कार्यों में लगे व्यक्तियों और संस्थानों को हम सभी का सहयोग मिलना चाहिए। डॉ. भागवत ने कहा कि केवल सीमाओं की रक्षा करना पर्याप्त नहीं है। सामाजिक सामंजस्य, आर्थिक शक्ति और सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने सामाजिक सद्भाव, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों, स्वदेशी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी बात की।
वंदे मातरम के इतिहास और गायन से संबंधित इसके प्रोटोकॉल पर एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। प्रदर्शनी में तीनों सेनाओं के परम वीर चक्र विजेताओं की प्रेरणादायक तस्वीरें भी शामिल थीं।