बंग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवाओं में विवादित आरक्षण व्यवस्था पर उच्च न्यायालय के आदेश को अवैध बताते हुए उस पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से कक्षाओं में लौटने को कहा है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद देशभर में झडपें हुईं, जिनमें सौ से अधिक लोगों की जान गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 1971 के युद्ध में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के वंशजों के लिए सिविल सेवा नौकरियों में आरक्षण अब तीस प्रतिशत के स्थान पर केवल पांच प्रतिशत ही रहेगा। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी तीस प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार ने 2018 में इस कोटा प्रणाली को समाप्त कर दिया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने सरकार के इस आदेश को अवैध घोषित कर दिया था। इसके विरोध में देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इस दौरान देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया और देखते ही गोली मारने के आदेश दिए ।