राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि नालंदा का पुनुरूद्धार केवल बिहार या भारत की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के लिए बौद्धिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत का प्रतीक है। राष्ट्रपति नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं।
राष्ट्रपति ने बताया कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के सदस्य देशों के सहयोग से नालंदा विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जो वैश्विक समुदाय के साझा मूल्यों को दर्शाता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राष्ट्रपति ने 31 देशों के छात्रों को उपाधियां वितरित कीं। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में दक्षिण-पूर्व एशियाई अध्ययन केंद्र का औपचारिक उद्घाटन भी किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने दो हजार लोगों की क्षमता वाले विश्वामित्रालय सभागार का भी उद्घाटन किया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सेवा निवृत सैयद अता हसनैन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।