उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि किसी भी संविधान की प्रस्तावना उसकी आत्मा होती है और इसे बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत को छोड़कर किसी भी देश के संविधान की प्रस्तावना में बदलाव नहीं किया गया है। नई दिल्ली में पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि प्रस्तावना ही वह आधार है जिस पर संविधान विकसित हुआ है, लेकिन दुख की बात यह है कि इसमें आपातकाल के दौरान बदलाव किया गया जब लोगों को लगभग गुलाम बना दिया गया था। श्री धनखड़ ने कहा कि आपातकाल के दौरान प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता जैसे शब्दों को जोड़ना संविधान निर्माताओं की सोच के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि यह हजारों वर्षों से इस देश की सभ्यतागत संपदा और ज्ञान को कमतर आंकने के अलावा और कुछ नहीं है।
अम्बेडकर के संदेशों की समकालीन प्रासंगिकता पर जोर देते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि डॉ. बी.आर. अम्बेडकर लोगों के दिलों में रहते हैं और उनके संदेश देशवासियों के लिए आज भी प्रासंगिक हैं।