सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मायाबंदर में 200 करोड़ रुपये की लागत से एक स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाह के विकास को मंजूरी दे दी है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत सत प्रतिशत केन्द्रीय सहायता से वित्त पोषित होगी।
यह बंदरगाह 430 मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित सुविधाएं प्रदान करेगा और प्रति वर्ष 9,900 टन मछली की लैंडिंग करेगा। इसमें सतत मत्स्य प्रबंधन, मछली संभालने की बढ़ी हुई क्षमता, बेहतर परिचालन सुरक्षा, ऊर्जा-कुशल प्रणालियां और डिजिटल ट्रेसबिलिटी को एकीकृत किया जाएगा। इससे रोजगार सृजन, हितधारकों की आय में वृद्धि, आजीविका में मजबूती और अवैध, तथा अनधिकृत मछली पकड़ने से निपटने में मदद मिलेगी।
मंत्रालय ने कहा कि उत्पादन, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, मछुआरा कल्याण और कटाई के बाद की मूल्य श्रृंखलाओं में 39 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सार्वजनिक निवेश से देश के मत्स्य पालन क्षेत्र में बहुत वृद्धि हुई है। मछली उत्पादन पिछले एक दशक में दोगुने से भी अधिक बढ़कर 2013-14 में 96 लाख टन से 2024-25 में 190 लाख टन से अधिक हो गया है।
यह मंजूरी द्वीपों की मत्स्य पालन क्षमता को उजागर करने और 2030-31 तक एक लाख करोड़ रुपये के समुद्री भोजन निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।