अप्रैल 1, 2026 6:52 अपराह्न

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आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा ने आज पारित कर दिया। विधेयक में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में संशोधन किया गया है और अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में वैधानिक दर्जा देने का प्रावधान है।

विधेयक पर चर्चा का जबाव देते हुए गृह राज्‍य मंत्री नित्‍यानंद राय ने कहा कि आन्‍ध्र प्रदेश विधानसभा ने 28 मार्च को एक प्रस्‍ताव पारित करके अमरावती को आन्‍ध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में वैधानिक दर्जा देने का केन्‍द्र से आग्रह किया था। श्री राय ने विधेयक का समर्थन करने वाले सदस्‍यों का आभार व्‍यक्‍त किया। 

इससे पहले विधेयक का समर्थन करते हुए कांग्रेस के बी. मणिक्कम टैगोर ने कहा कि किसी राज्य की प्रगति स्थिरता के बिना नहीं हो सकती और शासन व्यवस्था एक निश्चित केंद्र के बिना नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत हुए विभाजन ने राज्य की आर्थिक संरचना को मौलिक रूप से बदल दिया है।

तेलुगु देशम पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि आंध्र प्रदेश के लोग इस विधेयक और अमरावती को मिले वैधानिक दर्जे से उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि किसानों ने इसे राजधानी बनाने के लिए अपनी जमीनें दी हैं।

भाजपा के सी.एम. रमेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश को अपनी राजधानी अमरावती मिल रही है, जो जनता की राजधानी और हरित राजधानी होगी। उन्होंने कहा कि राजधानी का मतलब सिर्फ इमारतें नहीं है, बल्कि यह सम्मान और संप्रभुता का प्रतीक है और शासन का प्राथमिक केंद्र भी है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पी. वी. मिथुन रेड्डी ने कहा कि वर्तमान स्थिति में यह विधेयक जनता के लिए किसी काम का नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अमरावती के खिलाफ नहीं है, बल्कि विधेयक के खिलाफ है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट भी किया।

भाजपा की डी. पुरंदेश्वरी ने कहा कि 2014 में जब राज्य का विभाजन हुआ, तब तेलंगाना ने हैदराबाद से अपनी यात्रा शुरू की, लेकिन आंध्र प्रदेश के पास न तो राजधानी थी, न विधानसभा, न सचिवालय और न ही कोई प्रशासनिक ढांचा। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए जब तीन राज्यों का गठन हुआ, तब राज्यों को राजधानियां आवंटित की गईं, लेकिन 2014 में आंध्र प्रदेश को घोर अपमान का सामना करना पड़ा। डी. पुरंदेश्वरी ने कहा कि आंध्र प्रदेश की जनता ने राष्ट्र के हितों को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्वक और संवैधानिक रूप से इस नुकसान को सहन किया।

समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत, कांग्रेस के आर रघुराम रेड्डी और वामसी कृष्ण गद्दाम सहित अन्य लोगों ने भी चर्चा में भाग लिया।

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