उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि संविधान सदन में 58 भित्ति चित्र कलात्मक कार्य से कहीं अधिक हैं। ये भित्ति चित्र भारत की सभ्यतागत यात्रा की दृश्यात्मक प्रस्तुति हैं। श्री राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में राज्यसभा की सांसद सुधा मूर्ति द्वारा रचित पुस्तक ‘टाइड्स ऑफ टाईम’ के विमोचन के दौरान यह बात कही। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक कालजयी सुंदरता और संसदीय भित्ति चित्र के पेशेवर प्रतीक को समाहित करती है। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र को सदा पश्चिम से आने वाली आधुनिक व्यवस्था के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि भारत के प्राचीन ग्रंथ स्पष्ट रूप से देश में लोकतंत्र की परम्परा नई नहीं होने का प्रमाण हैं। उपराष्ट्रपति ने बताया कि बातचीत, बहस, असहमति और चर्चा पर आधारित संसद जीवंत लोकतंत्र के ज़रूरी साधनों का जीता-जागता उदाहरण है।
इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत की समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास भविष्य की पीढियों के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संसद चर्चा और संवाद के लिए सिर्फ एक मंच नहीं बल्कि भविष्य की पीढियों के लिए प्रेरणा का एक केन्द्र भी है। श्री बिरला ने कहा कि देश आज नये भारत के निर्माण की दिशा में विकास के पथ पर अग्रसर है।