सर्वोच्च न्यायालय ने आज कहा कि तकनीकी कंपनियां डेटा साझाकरण के नाम पर नागरिकों के निजता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं कर सकतीं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग-सीसीआई के आदेश के खिलाफ मेटा और व्हाट्सएप की अपीलों की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उन पर कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने उनकी निजता की नीति को लेकर 213 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि वह 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करेंगे। न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी याचिकाओं में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोगकर्ता डेटा साझा करने की शोषणकारी प्रथा की आलोचना की। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान के नियमों का पालन नहीं करने वाले जिम्मेदार लोगों को भारत छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों की निजता से समझौता नहीं किया जाएगा।
मेटा और व्हाट्सएप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अखिल सिबल ने तर्क दिया कि सभी संदेश एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं यानी यह पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि यह कंपनियां भी डेटा तक पहुंच नहीं सकतीं।