सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण -एस.आई.आर. प्रक्रिया के अभ्यास में लगे सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना का संज्ञान लेते हुए इसे निंदनीय बताया है।
इस घटना को अत्यंत सुनियोजित बताते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को सी.बी.आई. या एन.आई.ए. से जांच कराने का आदेश देने और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय सशस्त्र बलों को भी क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल ने उन्हें इसके बारे में देर रात और फिर सुबह सूचित किया था। सूचना मिलने के बावजूद, मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और स्थानीय पुलिस अधीक्षक की भूमिका को बेहद निराशाजनक रही।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायाधीशों को डराने-धमकाने या उनके कार्य में बाधा डालने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार की निष्क्रियता अत्यंत निंदनीय है।
न्यायालय ने कहा कि यह घटना, अधिकारियों का मनोबल गिराने और राज्य में जारी चुनावी प्रक्रिया को रोकने के लिए सोची-समझी साजिश जान पड़ती है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मालदा में कुछ लोगों ने तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि गृह सचिव, राज्य पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी और सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि एस.आई.आर. में आवेदन दाखिल करते समय या सुनवाई के दौरान, दो या तीन से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी और संबंधित जिला कार्यालय में पांच से अधिक व्यक्तियों को एकत्र होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त पत्र के जवाब में, न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य अधिकारियों से इस संबंध में जवाब भी मांगा है। इन सभी अधिकारियों को 6 अप्रैल को शाम 4 बजे वर्चुअल रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।