सरकार ने कहा है कि किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं है और देश के पास 60 दिन के कच्चे तेल, 60 दिन के प्राकृतिक गैस और 45 दिन के एलपीजी का भंडार है। यह जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में पश्चिम एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की 5वीं बैठक के दौरान दी गई। बैठक में संघर्ष में नवीनतम घटनाक्रमों का जायजा लिया गया और जनता पर इसके न्यूनतम प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए देश की तैयारियों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई। भारत उन चुनिंदा देशों में से है जहां संघर्ष शुरू होने के 70 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में पेट्रोलियम की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। बैठक के दौरान बताया गया कि विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर के स्तर पर है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल शोधक और पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को निर्यात करता है और घरेलू मांग को पूरा कर रहा है।
मंत्रियों को सूचित किया गया कि जनता के लिए आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडार है और वर्तमान संरक्षण का उद्देश्य संकट के लंबे समय तक बने रहने की स्थिति में दीर्घकालिक क्षमता निर्माण करना है। सरकार ने कहा कि आपूर्ति प्रबंधन सही है और लोगों को घबराने या ईंधन और अन्य उत्पादों की अत्यधिक खरीद करने की आवश्यकता नहीं है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री ने लोगों से मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और कार पूलिंग को अपनाकर पेट्रोल तथा डीजल की खपत कम करने का आग्रह किया था। उन्होंने नागरिकों से अनावश्यक विदेश यात्रा से परहेज करके, घरेलू पर्यटन और देश के भीतर समारोहों को प्राथमिकता देने और एक वर्ष के लिए गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचकर विदेशी मुद्रा भंडार के संरक्षण में मदद करने का भी आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग 50% तक कम करने, प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने, मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करने और कृषि में डीजल पंपों के स्थान पर सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंपों को व्यापक रूप से अपनाने को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मंत्रालयों और राज्यों को समन्वित तरीके से ईंधन दक्षता, जन जागरूकता और जिम्मेदार उपभोग व्यवहार को संस्थागत रूप देने के लिए उपाय पहचानने और लागू करने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान चरण में भारत का प्राथमिक लक्ष्य ऊर्जा प्रवाह को निर्बाध बनाए रखने, आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने पर है। उन्होंने सभी हितधारकों को हर स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया। श्री सिंह ने देश के ऊर्जा मिश्रण को बदलने की प्रक्रिया में तेजी लाने, नवीकरणीय ऊर्जा आधारित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का तेजी से विस्तार करने और अधिक विश्वसनीय और विविध ऊर्जा स्रोतों की पहचान करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए रणनीतिक भंडार आवश्यकताओं के पुनर्मूल्यांकन का आह्वान किया। उन्होंने रणनीतिक संकट की पूर्वसूचना, प्रारंभिक चेतावनी आकलन, परिदृश्य नियोजन और समय पर संपूर्ण सरकारी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, हरदीप सिंह पुरी, किरेन रिजिजू, के राममोहन नायडू, सरबानंदा सोनोवाल और डॉ. जितेंद्र सिंह उपस्थित थे।