जनवरी 28, 2026 2:11 अपराह्न

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विकसित भारत जी राम जी अधिनियम ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान करेगा:राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास के लिए विकसित भारत जी-राम-जी कानून लागू किया गया है। बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि नए कानून के अंतर्गत गांव में 125 दिनों के  रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की गई है। यह भ्रष्टाचार और गबन को रोकने में भी सहायक होगा, जिसके लिए सरकार लंबे समय से प्रयास कर रही है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस योजना से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और किसानों, पशुपालकों तथा मछुआरों के लिए नई सुविधाओं का सृजन होगा।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से आज सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लगभग 95 करोड़ भारतीयों को मिल रहा है जबकि, वर्ष 2014 की शुरुआत में केवल 25 करोड़ नागरिकों को ही इन योजनाओं का लाभ मिल रहा था। राष्ट्रपति ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दृष्टिकोण देश के सभी नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विश्‍व ने भारतीय सेना की वीरता और पराक्रम को देखा है। उन्होंने कहा कि देश ने अपने संसाधनों का उपयोग करते हुए आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर किसी भी आतंकवादी हमले का दृढ़ और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन भी आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का एक हिस्सा है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश की रक्षा प्रणालियों को और मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र जारी है। उन्होंने कहा कि 2025 में भारत का रक्षा उत्पादन 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि रक्षा निर्यात भी 23 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को पार कर गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में निर्मित रक्षा प्लेटफार्मों पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की नीति के अनुरूप सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि वर्षों से देश के 126 जिलों में असुरक्षा, भय और अविश्वास का माहौल बना हुआ था। अब यह घटकर केवल आठ जिलों तक रह गया है। इनमें केवल तीन जिले माओवाद से सर्वाधिक प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में दो हजार माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। 

राष्ट्रपति ने कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर ने हमेशा समानता और सामाजिक न्याय पर जोर दिया और संविधान भी लोगों को इसी भावना से प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार सच्चे अर्थों में सामाजिक न्याय के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसी के फलस्वरूप पिछले एक दशक में 25 करोड़ नागरिकों ने गरीबी से मुक्ति पाई है। उन्होंने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को सशक्त बनाने का अभियान और भी अधिक गति से आगे बढ़ा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि देश के युवाओं, किसानों, श्रमिकों और उद्यमियों को विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाते देखकर उन्हें संतोष का अनुभव हो रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार की सुदृढ़ नीतियों और पहलों के कारण देश में कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है। खाद्य और बागवानी फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार उन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है जिनमें कृषि क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय मिशनों के माध्यम से खाद्य तेलों, तिलहन और दालों पर कृषि उत्पादों के आयात को कम करना भी है।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत इस दशक के अंत तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त कर लेगा।उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में 7 हजार 200 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इससे दूरस्थ, पहाड़ी, जनजातीय और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो गयी है।

उन्होंने कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में अपनी नींव मजबूत की है और वर्ष 2026 विकसित भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता को तेजी से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  जन-विश्वास अधिनियम का एक नया संस्करण पेश किया गया है। अब तक 300 से अधिक प्रावधानों को  अपराध श्रेणी से हटा दिया गया है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए सरकार इस सुधार अभियान की गति को और तेज करेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संसद, सरकार और नागरिक मिलकर विकसित भारत के संकल्प को पूरा करेंगे। नागरिक राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च महत्व देकर संवैधानिक मूल्यों को कायम रखते हुए आगे बढ़ेंगे। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नागरिक राष्ट्रीय हित और देश के कल्याण के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।