प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं में वित्तीय साक्षरता और बीमा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के पानीपत में बीमा सखी योजना का शुभारंभ किया। भारतीय जीवन बीमा निगम की इस पहल से 18 से 70 वर्ष तक आयु की महिलाओं का सशक्तीकरण होगा। इस योजना के अंतर्गत दसवीं पास महिलाओं को विशेषज्ञता प्रशिक्षण दिया जाएगा और पहले तीन वर्ष के लिए मासिक भत्ता दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने भावी बीमा सखियों को नियुक्ति प्रमाण पत्र वितरित किये।
इस अवसर पर श्री मोदी ने करनाल में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर की आधारशिला भी रखी। चार सौ 95 एकड़ में फैले इस परिसर और छह क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्रों की स्थापना सात सौ करोड़ रूपये से अधिक लागत से की जाएगी। इस विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए एक बागवानी महाविद्यालय और बागवानी के दस क्षेत्रों से संबंधित पांच विद्यालय होंगे। यह फसल विविधिकरण और बागवानी प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए विश्वस्तरीय अनुसंधान के लिए काम करेगा।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले दस वर्षों में महिला सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाये हैं। उन्होंन कहा कि देश ने बीमा सखी योजना के शुभारंभ के साथ महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ओर कदम बढ़ा लिया है।
श्री मोदी ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए और अवसर प्रदान करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने कुछ वर्ष पहले पानीपत से ही बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान शुरू किया था। इस अभियान का न केवल हरियाणा में बल्कि देशभर में सकारात्मक प्रभाव पडा लेकिन अब उन्होंने पानीपत की इसी धरती से ही बीमा सखी योजना का शुभारंभ किया है। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा ने – एक हैं तो सेफ हैं का मंत्र जिस प्रकार स्वीकार किया है यह शेष भारत के लिए भी एक उदाहरण है।
इस अवसर पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने बीमा सखी योजना के अंतर्गत तीन वर्षों में दो लाख से अधिक महिलाओं की भर्ती का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि इसमें आयु किसी प्रकार की रूकावट नहीं होगी और 18 से 70 वर्ष तक की महिलाएं इसका लाभ उठा सकेंगी। वित्तमंत्री ने कहा कि महिलाओं के कल्याण और सशक्तीकरण से संबंधित योजनाओं के लिए तीन लाख तीस हजार करोड़ रूपये की राशि निर्धारित की गई है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शुरू हुई इन योजनाओं से हरियाणा में लड़का – लड़की अनुपात में सुधार हुआ है और एक हजार लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या नौ सौ हो गई है।