प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल ब्रिटेन की यात्रा पर जा रहे हैं। दो दिन की इस यात्रा के दौरान, वे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ चर्चा करेंगे और किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात करेंगे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी भारत और ब्रिटेन के दिग्गज कारोबारियों से बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि यह श्री मोदी की ब्रिटेन की चौथी यात्रा होगी।
विदेश सचिव ने कहा कि यह यात्रा दोनों नेताओं को भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करने और इसे और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा का अवसर प्रदान करेगी। वे क्षेत्रीय और वैश्विक प्रासंगिकता के मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। भारत-ब्रिटेन साझेदारी को 2021 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया गया था। श्री मिस्री ने कहा कि दोनों पक्ष इस साझेदारी को और भी उच्च स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं।
श्री मिसरी ने बताया कि साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय ने हाल में गुरुग्राम में अपना परिसर खोला है। नई शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने वाला यह पहला विदेशी विश्वविद्यालय है। विदेश सचिव ने कहा कि कई अन्य ब्रिटिश विश्वविद्यालय भी भारत में परिसर खोलने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में 55 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। ब्रिटेन भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक भी है, जिसका कुल निवेश 36 अरब डॉलर है। भारत, ब्रिटेन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक बड़ा स्रोत है, जिसका कुल निवेश लगभग 20 अरब डॉलर है। ब्रिटेन में लगभग एक हज़ार भारतीय कंपनियाँ हैं जो रोज़गार प्रदान करती हैं।
विदेश सचिव ने यह भी कहा कि नीति आयोग और लंदन शहर के बीच समन्वित यूके-इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग ब्रिज, भारत में हरित बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए वित्त जुटाने में ब्रिटिश विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए काम करता है। विदेश सचिव ने आगे कहा कि रक्षा क्षेत्र में, भारत और ब्रिटेन के बीच नियमित रूप से बातचीत हो रही है। ब्रिटेन भारत के लिए एक बहुत बड़ा अनुसंधान और नवाचार भागीदार भी बना हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के निमंत्रण पर शुक्रवार से शनिवार तक मालदीव की राजकीय यात्रा करेंगे। विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री शनिवार को मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के समारोह में ‘मुख्य अतिथि’ होंगे। यह प्रधानमंत्री की मालदीव की तीसरी यात्रा होगी और डॉ. मोहम्मद मुइज़्ज़ू के राष्ट्रपति के कार्यकाल में किसी राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष की मालदीव की पहली यात्रा होगी। श्री मोदी राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ बैठक करेंगे और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।
विदेश सचिव ने कहा कि मालदीव भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और विज़न “महासागर” में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भागीदार है। उन्होंने कहा कि जब भी मालदीव को प्राकृतिक या मानव निर्मित किसी भी संकट का सामना करना पड़ा है, भारत हमेशा उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सबसे पहले आगे रहा है। श्री मिस्री ने कहा कि उच्च स्तर पर नियमित यात्राओं से दोनों देशों के बीच मज़बूत राजनीतिक संबंध रहे हैं।
भारत मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है। द्विपक्षीय व्यापार लगभग 50 करोड डॉलर का है। दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते और निवेश संधि पर भी बातचीत कर रहे हैं। अक्षय ऊर्जा और मत्स्य पालन सहित सहयोग के नए क्षेत्रों पर भी काम किया जा रहा है। विदेश सचिव ने कहा कि भारत, मालदीव का पारंपरिक विकास साझेदार रहा है और विभिन्न पहलों को क्रियान्वित करता रहा है।
विदेश सचिव ने कहा कि भारत का मालदीव के साथ मज़बूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी है। उन्होंने कहा कि भारत मालदीव को उसकी क्षमता निर्माण और उसके रक्षा कर्मियों को प्रशिक्षित करने में निरंतर सहायता प्रदान करता रहेगा। दोनों देश कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के दायरे में भी सहयोग कर रहे हैं।
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर के बारे में, विदेश सचिव ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने के बाद से दोनों पक्ष निकट संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष वर्तमान में कानूनी प्रक्रिया और अन्य अंतिम समय की औपचारिकताओं को पूरा करने में लगे हुए हैं।
खालिस्तानी चरमपंथियों पर एक प्रश्न के उत्तर में, श्री मिस्री ने कहा कि यह मुद्दा भारत के लिए चिंता का विषय है और इसे ब्रिटेन के ध्यान में लाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि यह न केवल भारत के लिए, बल्कि उसके सहयोगियों के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि इससे इन देशों में सामाजिक सामंजस्य और सामाजिक व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में विदेश सचिव ने बताया कि भारत और ब्रिटेन के बीच भगोड़ों के भारत प्रत्यर्पण के संबंध में भी चर्चा हुई है।