प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज काकोरी घटना के क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में श्री मोदी ने कहा कि सौ साल पहले आज ही के दिन लखनऊ के निकट काकोरी में देशभक्त भारतीयों ने साहस का परिचय देते हुए औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध लोगों के आक्रोश को उजागर किया।
उन्होंने कहा कि ये देशभक्त इसलिए नाराज थे क्योंकि जनता के धन का दुरूपयोग औपनिवेशिक शोषण को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि क्रांतिकारियों की वीरता को भारत की जनता हमेशा याद रखेगी। उन्होंने कहा कि सरकार एक मजबूत और समृद्ध भारत के उनके सपनों को साकार करने के लिए काम करती रहेगी।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन भारत के स्वाधीनता संग्राम में साहस, बलिदान और देशभक्ति का प्रतीक है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में श्री शाह ने कहा कि 9 अगस्त 1925 को रामप्रसाद बिस्मिल, चन्द्रशेखर आजाद और अशफाकउल्ला खॉ जैसे वीरों ने अंग्रेजों की लूट के विरूद्ध क्रांति की मशाल जलाकर अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ों को हिला दिया था। उन्होंने कहा कि इन वीरों ने काकोरी ट्रेन एक्शन को इसलिए अंजाम दिया क्योंकि अंग्रेजों द्वारा भारतीयों से लूटे गए धन का उपयोग देश के कल्याण के लिए नहीं किया जा रहा था। गृहमंत्री ने कहा कि देश इन वीरों की बहादुरी और शौर्य का हमेशा आभारी रहेगा।
1925 में आज ही के दिन लखनऊ के पास काकोरी रेलवे स्टेशन के निकट भारत के स्वाधीनता आंदोलन की एक सबसे महत्वपूर्ण घटना घटी थी। 9 अगस्त को हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने काकोरी के निकट नंबर 8 डाउन रेलगाड़ी को रोककर गॉर्ड केबिन से ब्रिटिश सरकार के राजकोष का धन लूट लिया था।
क्रांतिकारियों में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खॉ, ठाकुर रोशन सिंह, राजेन्द्रनाथ लाहिरी और सचिन्द्रनाथ सान्याल शामिल थे। इस कार्रवाई का उद्देश्य भारतीयों से कर के रूप में एकत्र धन को लूटकर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन को वित्तपोषित करना और ब्रिटिश शासन द्वारा भारतीयों से जबरन कर वसूले जाने के खिलाफ रोष व्यक्त करना था।