संसद ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 पारित किया

संसद ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा ने आज इसे मंजूरी दी, वहीं लोकसभा पहले ही इसे पारित कर चुका है। यह विधेयक आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 में संशोधन करता है और अमरावती को राज्‍य की एकमात्र राजधानी के रूप में वैधानिक दर्जा प्रदान करता है। विधेयक के पारित होने के साथ ही अमरावती अब आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी होगी। राज्‍यसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित होने के बाद उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के लोगों को बधाई दी।

 

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 के अंतर्गत विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश के लिए एक नई राजधानी स्थापित की जानी थी। इसे राज्य और दुनियाभर के तेलुगु समुदाय के लिए ऐतिहासिक क्षण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक आंध्र प्रदेश के पांच करोड़ से अधिक लोगों के गौरव, आस्था और लोकतांत्रिक विश्वास की बहाली का प्रतीक है।

 

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने 23 अप्रैल 2016 को अमरावती को राजधानी घोषित करते हुए अधिसूचना जारी की थी। श्री राय ने बताया कि अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में संवैधानिक मान्यता देने के लिए राज्‍य विधानसभा ने 28 मार्च 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर सरकार से अनुच्छेद 5(2) में संशोधन करने का अनुरोध किया था।

 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधानसभा के प्रस्ताव को प्रभावी बनाने और राजधानी के मुद्दे पर कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए यह संशोधन प्रस्तावित किया गया था। आंध्र प्रदेश के लोगों को बधाई देते हुए उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा और विकसित भारत की परिकल्पना में सार्थक योगदान देगा।

 

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि यह विधेयक राज्य को लंबे समय से प्रतीक्षित स्पष्टता प्रदान करता है और देश के राजनीतिक नेतृत्व और लोकतांत्रिक संस्थानों में नए सिरे से विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल राजधानी की पहचान करने का नहीं है, बल्कि विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश के भविष्य और आत्मसम्मान को पुनर्परिभाषित करने का है।

 

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में औपचारिक रूप से स्थापित करने में 12 साल की देरी को संसद और केंद्र दोनों की ऐतिहासिक विफलता बताया। उन्होंने कहा कि संसद में प्रतिबद्धता जताई गई थी, लेकिन प्रक्रिया को एक दशक से अधिक समय तक लटकाए रखने से राज्य लंबे समय तक अनिश्चितता में रहा। अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने का समर्थन करते हुए, कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह निर्णय अमरावती के किसानों और लोगों के लंबे संघर्ष का परिणाम है।

 

आंध्र प्रदेश के वाई.एस.आर.सी.पी सांसद येर्राम वेंकट सुब्बा रेड्डी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं करता है। जिन किसानों ने अपनी जमीन दी थी और उन्‍हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। विधेयक का समर्थन करते हुए टीडीपी सांसद मस्थान राव यादव ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ राजधानी के बारे में नहीं है, बल्कि यह राज्‍य के लोगों की आत्मा और पहचान है।