विद्युत अभियांत्रिकी सेवा – सी.पी.ई.एस. और भारतीय आर्थिक सेवा – आई.ई.एस. के अधिकारियों ने आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं और उनके निर्णय एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियों को आकार देने और सुधारों को लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और उत्साह की भावना से कार्य करने की सलाह दी।
सी.पी.ई.एस. अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बिजली औद्योगिक विकास, नवाचार, जीवन स्तर में सुधार और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति का प्रेरक बल है। उन्होंने कहा कि सी.पी.ई.एस. बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्रों में नियोजन और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, साथ ही बिजली प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ अभियांत्रिकी पद्धतियों और नवीन समाधानों के माध्यम से देश के विद्युत अवसंरचना को मजबूत करने में सीपीईएस अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
राष्ट्रपति ने आई.ई.एस. अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिवेश में, सार्वजनिक सेवा में आर्थिक नियोजन और कार्यान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि सतत विकास सुनिश्चित करने, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसरों को बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल परिवेश में अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में आई.ई.एस. अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। राष्ट्रपति मुर्मु ने उन्हें याद दिलाया कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी छिपी होती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक नीति का सही माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है, और इससे लोगों, विशेष रूप से सबसे कमजोर वर्ग के जीवन में सुधार होना चाहिए।