नेपाल में सितंबर में हुए जनरेशन जेड के विरोध प्रदर्शनों की जांच कर रहे आयोग ने पाया है कि राष्ट्रीय जांच विभाग-एन आई डी प्रदर्शनों के पैमाने का सही आकलन करने में विफल रहा, जिससे सुरक्षा तैयारियां अपर्याप्त रहीं।
कार्की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि एनआईडी ने अनुमान लगाया था कि 8 सितंबर को काठमांडू में केवल 3 हजार से 5 हजार प्रदर्शनकारी ही इकट्ठा होंगे, जिसके चलते अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अपनी तैनाती कम करनी पड़ी।
अधिकारियों ने बाद में आयोग को बताया कि गलत खुफिया जानकारी के कारण व्यवस्थाएं ढीली पड़ गईं, क्योंकि उपस्थिति अनुमान से कहीं अधिक थी।
जांच समिति ने एनआईडी प्रमुख हुतराज थापा के कामकाज की कमियों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने टिकटॉक, एक्स और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लामबंदी की निगरानी के लिए तकनीक और कुशल कर्मचारियों की कमी का हवाला दिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एजेंसी देर रात सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने के फैसले के बाद सरकार को चेतावनी देने में भी विफल रही, जिसके बाद 9 सितंबर को व्यापक हिंसा और लूटपाट हुई।
पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने आयोग को बताया कि वे जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं थे और कहा कि परिचालन संबंधी निर्णय गृह मंत्रालय संभालता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अशांति के दौरान हुई ज्यादतियों के लिए मूल प्रदर्शनकारी नहीं बल्कि घुसपैठिए जिम्मेदार थे।