प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना युवाओं में स्वरोजगार को बढ़ावा देने में बहुत लाभकारी सिद्ध हुई है। 2015 में शुरू हुई इस योजना ने आज 11 साल पूरे कर लिए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में श्री मोदी ने कहा कि इस योजना की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि जब लोगों को सही अवसर मिलते हैं, तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मुद्रा योजना ने लाखों लोगों को सपने देखने का आत्मविश्वास दिया है। योजना ने उन सपनों को पूरा करने के साधन प्रदान करके ऋण तक पहुंच को फिर से परिभाषित किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बाधाओं को दूर करके और लोगों की आकांक्षाओं पर भरोसा करके, इसने पूरे देश में उद्यमशीलता की भावना को मजबूत किया है।
इस अवसर पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि इस योजना ने देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा अनगिनत व्यक्तिगत उद्यमियों के लिए ऋण व्यवस्था को नया रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत में एक ऐसा बदलाव आया है जहां करोड़ों आम नागरिकों ने नए आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ उद्यमशीलता के क्षेत्र में कदम रखा है।
श्रीमती सीतारामन ने कहा कि इस पहल से ऋण प्राप्त करने में आने वाली बाधाओं को दूर करके उद्यमशीलता का सही मायने में लोकतंत्रीकरण हुआ है। वित्त मंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनने की राष्ट्रव्यापी यात्रा में उद्यमियों को सक्रिय भागीदार बनाने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना मदद करेगी।
इस योजना के अंतर्गत अब तक 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लगभग 58 करोड़ ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से दो-तिहाई ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं। लगभग पांचवां हिस्सा पहली बार व्यापार शुरू करने वाले उद्यमियों को दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय पहुंच में मौजूद अंतर को कम करना है, जिसके तहत लघु व्यवसायों को समर्थन देने के लिए 20 लाख रुपये तक के सरल, आसान और बिना गारंटी वाले ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं। मुद्रा ऋण चार श्रेणियों में दिए जा रहे हैं, जिनमें शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस शामिल हैं। ये श्रेणियां उधारकर्ताओं के विकास के चरण और उनकी वित्तीय आवश्यकताओं को दर्शाती हैं।