अगस्त 11, 2025 4:32 अपराह्न

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मानसून सत्र: विपक्ष के हंगामें से दोनों सदनों में कार्यवाही हुई बाधित

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर विपक्षी दलों के विरोध के बीच लोकसभा की कार्यवाही शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। पहले स्थगन के बाद दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर, विधायी कार्य शुरू हुए और राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025 और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा शुरू हुई। सदन ने शोरगुल के बीच दोनों विधेयकों को पारित कर दिया। बाद में पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

 

राज्यसभा को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के कारण 10 मिनट के लिए दोपहर 3 बजे तक के लिए संक्षिप्त स्थगन का सामना करना पड़ा। संसद ने बजट (मणिपुर) 2025-26, मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 और मणिपुर विनियोग (संख्या 2) विधेयक, 2025 को अपनी मंज़ूरी दे दी है। राज्यसभा ने आज चर्चा के बाद इन विधेयकों को लोकसभा को लौटा दिया।

 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद से चुनाव आयोग तक विपक्षी सांसदों के मार्च का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि उन्हें रोका गया और चुनाव आयोग से मिलने नहीं दिया गया। सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने विपक्ष के व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि वे अप्रासंगिक मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।

 

श्री नड्डा ने कहा कि सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा हुई और सरकार ने तथ्यों को स्पष्ट रूप से लोगों के सामने रखा। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि मणिपुर का चैंपियन होने का दावा करने वाले विपक्ष ने मणिपुर पर विधेयकों को पारित करने में सहयोग नहीं किया। उन्होंने विपक्ष के आचरण को संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र नहीं, अराजकता और अवरोधवाद है।

 

इससे पहले, विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के हंगामे के बाद संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। जब राज्यसभा सुबह 11:00 बजे शुरू हुई, तो उपसभापति हरिवंश ने शून्यकाल चलाने की कोशिश की। विपक्षी सदस्यों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और अन्य मामलों का मुद्दा उठाया।

 

उन्होंने कहा कि उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों से पाँच विभिन्न मुद्दों पर 29 स्थगन नोटिस मिले हैं, जिनमें से 18 ऐसे मामलों से संबंधित हैं जो न्यायालय में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार जो मामला न्यायालय में विचाराधीन है, उस पर चर्चा नहीं की जाएगी और उन्होंने सभी नोटिसों को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने बार-बार विरोध कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने और सदन को चलने देने की अपील की।

 

श्री हरिवंश ने कहा कि राज्यसभा में लगातार व्यवधान के कारण 62 घंटे से अधिक का समय बर्बाद हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल सदस्यों के लिए हैं और उन्होंने विरोध कर रहे सदस्यों से सदन की कार्यवाही बाधित न करने का आग्रह किया। शोरगुल जारी रहने पर उपसभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

लोकसभा में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सुबह 11 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रदर्शनकारी सदस्य पूर्व नियोजित तरीके से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।

 

श्री बिरला ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 14 दिनों से सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है, जो लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार उचित नहीं है। शोरगुल के बीच ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव पर्यावास योजना के एकीकृत विकास से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दिया। बार-बार अपील के बावजूद विपक्षी सदस्यों ने अपना विरोध जारी रखा, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।