अप्रैल 1, 2026 8:38 अपराह्न

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लोकसभा ने जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2026 को पारित किया

लोकसभा ने जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। यह विधेयक कुछ अधिनियमों में संशोधन करके अपराधों को निर्दिष्ट श्रेणी से निकालने और तर्कसंगत बनाने का प्रयास करता है। इसे जीवन तथा व्यापार में सुगमता लाने के लिए विश्वास आधारित शासन को और मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है। विधेयक में छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और जुर्माने तथा दंड को अपराध के अनुपात में संशोधित करने के उपाय शामिल हैं। इसमें 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित 79 केंद्रीय अधिनियमों में संशोधन का प्रस्ताव है। कुल 784 प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित है। इनमें 717 प्रावधानों को व्यापार में सुगमता लाने और 67 प्रावधानों को जीवन में सुगमता लाने के लिए इस संशोधन में प्रस्‍तावित किया गया है।

विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह विधेयक जनता के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार के भरोसे और विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर भी मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और इस विधेयक में सजा के बजाय न्याय दिलाने के प्रावधान हैं। गोयल ने कहा कि यह विधेयक अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर शासन करने के लिए लाए गए पुराने कानूनों को समाप्त करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी नियमों को सरल बनाने और व्यापार करने में आसानी और जीवन यापन को आसान बनाने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि अब लोगों को छोटी-छोटी बातों के लिए अदालतों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्र सरकार ने सार्वजनिक सेवा व्यवस्था को सरल बनाने के लिए कई सुधार किए हैं।

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि यह विधेयक कई कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का दावा करता है, लेकिन वास्तविकता में इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक जनविश्वास को मजबूत नहीं करता और गहरे संरचनात्मक मुद्दों का समाधान करने में विफल है। श्री रेड्डी ने कहा कि आपराधिक दंडों को कम करने से व्यापार में कोई आसानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में नकली दवाइयों और मिलावटी सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण और बिक्री करने वालों के लिए कारावास का प्रावधान नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी के तेजस्वी सूर्या ने कहा कि यह विधेयक आसानी से व्यापार करने और जीवन यापन को सरल बनाने में भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़ा अपराध-मुक्तिकरण अभियान चलाया है। श्री सूर्या ने कहा कि इस एक विधेयक द्वारा सरकार एक हजार से अधिक छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सुधार नहीं है, बल्कि बाकी दुनिया के लिए एक उदाहरण है। श्री सूर्या ने कहा कि जन विश्वास विधेयक केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि यह अविश्वास से विश्वास की ओर और नियामक से सुविधादाता की ओर एक मौलिक दार्शनिक बदलाव को दर्शाता है। उन्‍होंने इस विधेयक को  विकसित भारत के निर्माण की नींव बताया।

जेडीयू के देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि यह विधेयक लोगों को अपराध न करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को राहत मिलेगी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।

शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद गणपत सावंत ने कहा कि सरकार को भारतीय जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के लिए भी पहल करनी चाहिए।

आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, आरएलपी के हनुमान बेनीवाल और समाजवादी पार्टी की प्रिया सरोज ने भी बहस में भाग लिया। लोकसभा की कार्यवाही पूरी होने के बाद ही सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया।                                          

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