कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का कौशल मंथन कल संपन्न हो गया। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी की अध्यक्षता में पिछले महीने की 23 से 31 तारीख तक आयोजित इस परामर्श सत्र में विभिन्न विभागों, संस्थानों और प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।
चर्चाओं का मुख्य केंद्र राष्ट्रीय उद्देश्यों के अनुरूप प्राथमिकता वाले सुधारों की पहचान करना था, जिसमें एक उत्तरदायी, परिणाम-उन्मुख और भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया। विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप कौशल संकल्प 2026 को अंतिम रूप दिया गया, जो आगामी वर्ष में नीतिगत कार्रवाई और कार्यक्रम कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि विचार-विमर्श के प्रमुख क्षेत्रों में संस्थागत तंत्रों को सुदृढ़ करना, प्रणालियों को सरल बनाना और जवाबदेही बढ़ाना शामिल थे। प्रौद्यागिक प्रशिक्षण संस्थान-आईटीआई के लिए परिणाम-आधारित ग्रेडिंग, विकेंद्रीकरण और परिभाषित प्रदर्शन संकेतकों के साथ क्षेत्रीय कौशल परिषदों के पुनर्गठन जैसे प्रस्तावों पर चर्चा की गई। तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य में प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर पाठ्यक्रम उन्नयन, उद्योग सह-निर्माण और लचीले प्रशिक्षण मॉडलों पर भी जोर दिया गया।