विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति के रास्ते अपनाने पर जोर दिया है। पश्चिम एशिया की स्थिति पर लोकसभा में बयान देते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि सरकार ने पिछले महीने की 20 तारीख को स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया था और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार उभरते घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा कि संघर्ष लगातार तेज हो रहा है और पश्चिम एशिया क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति काफी बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष अन्य देशों में भी फैल गया है, जिससे भारी तबाही मची है और सामान्य जीवन और गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
श्री जयशंकर ने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है क्योंकि यह एक पड़ोसी क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं तथा हजारों भारतीय पढ़ाई या रोजगार के लिए ईरान में हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और इसमें तेल और गैस के कई महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय ने स्थिति पर नजर रखने और प्रश्नों का उत्तर देने के लिए एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। श्री जयशंकर ने कहा कि कल तक लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक देश लौट चुके हैं। उन्होंने यह बयान विपक्ष के हंगामे के बीच दिया, जो इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था।
News On AIR | मार्च 9, 2026 8:57 अपराह्न | Jaishankar on west asiaconflict
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति को महत्वपूर्ण बताया