भारत की खुदरा मुद्रास्फीति वार्षिक आधार पर जनवरी के मुकाबले फरवरी में बढकर 3 दशमलव दो-एक प्रतिशत दर्ज हुई। 2024 आधार वर्ष वाली नई श्रृंखला के तहत जनवरी के लिए यह आंकडा कम होकर दो दशमलव सात-चार प्रतिशत पर आ गया था। फरवरी में वृद्धि के बावजूद मुद्रास्फीति अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक की निर्धारित सीमा से कम ही है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति बढ़कर 3 दशमलव तीन-सात प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी यह बढकर 3 दशमलव शून्य-दो प्रतिशत दर्ज हुई। अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर जनवरी के 2 दशमलव एक-तीन प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 3 दशमलव चार-सात प्रतिशत पर पहुंच गई।
आंकड़ों के अनुसार फरवरी में मुद्रास्फीति में वृद्धि का मुख्य कारण था- व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा सेवाएं, खाद्य और पेय पदार्थों और तंबाकू जैसे उत्पादों में बढते मूल्य।
अखिल भारतीय एकीकृत स्तर पर सबसे कम मुद्रास्फीति वाले पदार्थों में लहसुन, प्याज, आलू, अरहर अथवा तुअर दाल और लीची शामिल हैं। इसके विपरीत उच्च मुद्रास्फीति दर्शाने वाली वस्तुओं में सोने और चांदी के आभूषण, नारियल, टमाटर और फूलगोभी शामिल है। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार जनवरी के मुकाबले फरवरी में मासिक आधार पर टमाटर, मटर और फूलगोभी के सूचकांक में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।