रिजर्व बैंक ने अपने मासिक बुलेटिन जनवरीः 2025 में बताया कि घरेलू मांग में वृद्धि होने के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देबव्रत पात्रा की अगुवाई में लिखित स्टेट ऑफ द इकोनॉमी लेख के अनुसार ग्रामीण मांग में तेजी बरकरार है। यह तेजी उज्जवल कृषि संभावनाओं द्वारा समर्थित उपभोग में पलटाव को दर्शाती है।
लेख में कहा गया है कि बुनियादी ढांचे पर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में सुधार से प्रमुख क्षेत्रों में वृद्धि को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। हालांकि विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती इनपुट लागत के दबाव, मौसम संबंधी अनिवार्यताओं और वैश्विक प्रतिकूलताओं के कारण कुछ जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
लेख में कहा गया है कि पिछले वर्ष दिसम्बर महीने में लगातार दूसरी बार हेडलाईन मुद्रास्फीति में कमी आई। इसमें खाद्य मुद्रास्फीति में स्थिरता की चेतावनी दी गई है। इस कारण इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
लेख कहता है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था की गति में कुछ धीमापन आने के साथ 2025 का आर्थिक आउटलुक विभिन्न देशों में अलग-अलग है। यूरोप और जापान में कमजोर से मध्यम रिकवरी होने की संभावना है।
उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में अवस्फीति की अधिक निरन्तरता के अलावा उभरते और विकासशील देशों में अधिक मध्यम वृद्धि के आसार हैं।