भारत का रक्षा निर्यात पिछले वर्ष 23 हजार करोड़ रुपये रहा। इसके अगले दो-तीन वर्षों में दोगुना होने की उम्मीद है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी संस्थान की शासी परिषद के अध्यक्ष डॉ. समीर कामत ने आज पुणे में संस्थान के 14वें दीक्षांत समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी।
डॉ. कामत ने कहा कि पश्चिम एशिया, अफ्रीका और दक्षिण एशियाई देशों में भारतीय रक्षा उपकरणों की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल के छोटे संस्करण तथा ज़ोरावर लाइट टैंक के विकास पर काम चल रहा है।
समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से निर्मित स्वदेशी हथियारों, आयुधों और उपकरणों से काफी मदद मिली।
डॉ. समीर कामत ने बताया कि मिसाइल और उपकरण उत्पादन में संपूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए रक्षा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से 15 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।