जनवरी 15, 2026 8:13 पूर्वाह्न

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भारतीय नौसेना के नौकायन पोत-आईएनएसवी कौंडिन्य का मस्कत के बंदरगाह पर हुआ भव्य स्वागत

केंद्रीय पत्‍तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मस्कत के सुल्तान काबूस बंदरगाह पर भारतीय नौसेना के नौकायन पोत-आईएनएसवी कौंडिन्य के चालक दल का स्वागत किया। उन्‍होंने कहा कि यह केवल एक यात्रा का समापन नहीं है, बल्कि दो सभ्‍यताओं के बीच गहरे संबंधों का उत्‍सव है।

श्री सोनोवाल ने कहा कि पारंपरिक रूप से निर्मित इस जहाज़ का आगमन भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक व्यापार और मित्रता का प्रतीक है। पोरबंदर से अपनी पहली यात्रा पूरी करने के बाद मस्कत पहुंचा यह जहाज दोनों देशों की साझा समुद्री विरासत में एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह यात्रा पांच हजार वर्षों से अधिक पुराने समुद्री, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाती है। यह समुद्री यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और ओमान राजनयिक संबंधों के सत्तर वर्ष पूरे कर रहे हैं।

प्रसिद्ध भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर निर्मित यह जहाज भारत के स्वदेशी समुद्री ज्ञान, शिल्प कौशल और टिकाऊ जहाज निर्माण प्रथाओं को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की परिकल्पना की थी। नौसेना वास्तुकारों, पुरातत्वविदों, पारंपरिक जहाज निर्माण डिजाइनरों और कुशल जहाज निर्माताओं के सहयोग से नौसेना ने इसे क्रियान्वित किया। श्री सोनोवाल ने इस पोत को प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया । उन्‍होंने कहा कि भारत की प्राचीन पोत निर्माण प्रतिभा को पुनर्जीवित करना और इसे विश्व के समक्ष गौरवपूर्वक तरीके से प्रस्तुत करना प्रधानमंत्री का संकल्प था।

बंदरगाह पर आयोजित स्वागत समारोह में ओमान के विरासत और पर्यटन मंत्रालय में पर्यटन उप सचिव अज़ान अल बुसैदी, भारतीय नौसेना, ओमान की राज नौसेना, ओमान पुलिस तटरक्षक बल और अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। छात्रों सहित बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय ने पारंपरिक भारतीय और ओमानी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ पोत का स्वागत किया।

इस अवसर पर श्री सोनोवाल ने भारत के 84 लाख डॉलर के समुद्री विकास पैकेज की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य पोत निर्माण समूहों की स्थापना, समर्पित अनुसंधान एवं विकास सहायता और एक समुद्री विकास कोष की स्थापना के माध्यम से पोत निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। उन्होंने भविष्य में सहयोग के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में भारत और ओमान के बीच एक हरित शिपिंग कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा और सहयोग को मजबूत करने तथा दोनों देशों के साझा समुद्री इतिहास को समृद्ध करने के लिए समुद्री विरासत और संग्रहालयों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।