सरकार ने डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क लगाया है और पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम कर दिया है। इससे पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी और उपभोक्ताओं पर पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों का असर नहीं पड़ेगा।
पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि इन परिवर्तनों का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना है। उन्होंने बताया कि डीजल पर निर्यात शुल्क लगाया गया है, जबकि पेट्रोल पर शुल्क वर्तमान क्रैक मार्जिन से जुड़ा है और सरकारी तंत्र के माध्यम से हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया बहुत ही सुनियोजित रही है और उसने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क एवं अवसंरचना उपकर के रूप में कुछ निर्यात शुल्क लागू किए हैं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अस्थिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितता के समय डीजल और एटीएफ की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है। यह अगले दो महीनों के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और एलपीजी तथा पीएनजी की उपलब्धता संतोषजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी पूरी या उससे अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, जबकि घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आयात पर निर्भरता पर उन्होंने कहा कि पहले लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती थी और इस कारण सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। संयुक्त सचिव ने बताया कि वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति पहले कम की गई और फिर चरणबद्ध तरीके से बहाल की गई, पहले 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत, फिर 50 प्रतिशत और अब 70 प्रतिशत तक। उन्होंने कहा कि 14 मार्च से अब तक वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को लगभग 30 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है।
पोत, पत्तन, परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से 25 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी भारतीय ध्वज वाले जहाज या भारतीय नाविक के प्रभावित होने की कोई सूचना नहीं है और सभी सुरक्षित हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए फ्रांस में हैं। श्री जायसवाल ने कहा कि बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठकें कीं और द्विपक्षीय संबंधों के अलावा, पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में डॉ. जयशंकर ने विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण की ऊर्जा चुनौतियों, उर्वरक आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उठाया और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितताओं से भी अवगत कराया।
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र) असीम आर महाजन ने आश्वासन दिया कि सरकार खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रहने वाले विशाल भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए एक विशेष नियंत्रण कक्ष कार्यरत है।