भारत और यूरोपीय संघ ने भारत-यूरोपीय ऊर्जा व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद कार्य समूह दो के तहत ईवी बैटरी पुनर्चक्रण क्षमता को मजबूत करने के लिए 169 करोड़ रुपये की संयुक्त पहल शुरू की है।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा है कि यह पहल भारत-यूरोपीय ऊर्जा रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उन्होंने कहा कि देश के ईवी बाजार के तेजी से विस्तार के साथ, संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं के लिए एक मजबूत घरेलू पुनर्चक्रण प्रणाली का निर्माण आवश्यक है।
भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने हरित परिवर्तन के लिए बैटरियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवाचारों को इसके विकास की प्रक्रिया से आगे बढ़कर वास्तविक चरण में लागू करने का लक्ष्य है।
भारत और यूरोपीय संघ ने ईवी बैटरियों के पुनर्चक्रण पर केंद्रित प्रस्तावों के लिए तीसरा समन्वित आह्वान किया। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण कच्चे माल को सुरक्षित करना, चक्रीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक परिवर्तन को गति देना और भारत तथा यूरोपीय संघ के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। इस पहल को यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप कार्यक्रम के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा, जबकि भारी उद्योग मंत्रालय भारतीय घटक का समर्थन करेगा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन्नत पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों का विकास करना है, जिसमें उच्च दक्षता वाली सामग्री पुनर्प्राप्ति, सुरक्षित और डिजिटलीकृत संग्रह प्रणाली और नवाचार प्रक्रियाओं का प्रायोगिक प्रदर्शन शामिल है। इस कार्यक्रम से भारत में एक संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ पायलट लाइन की स्थापना में भी मदद मिलेगी जिसमें अग्रणी शोधकर्ता, उद्योग और स्टार्टअप्स जुड़ सकेंगे।