एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा लैंगिक आधार पर मानवाधिकार उल्लंघनों में तीव्र वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। वर्ष 2025 में बलूच महिलाओं का जबरन गायब होना शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में बलूच यकजेहती समिति-बीवाईसी ने कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा बलूच महिलाओं को जबरन गायब किया जाना दमन और सामूहिक दंड के एक व्यापक तथा व्यवस्थित स्वरूप को दर्शाता है।
बीवाईसी के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान बलूचिस्तान के कई जिलों में महिलाओं और लड़कियों से जुड़े जबरन गायब होने के कम से कम 12 मामले दर्ज किए गए। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि ये घटनाएं पाकिस्तान के सुरक्षा अभियानों, आतंकवाद विरोधी उपायों और सैन्यीकृत शासन के नाम पर किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों के व्यापक संदर्भ में घटी हैं, जहां बलूच महिलाएं तेजी से राज्य हिंसा की शिकार बन रही हैं।
बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से स्थिति की तत्काल निगरानी करने का आह्वान करते हुए कहा कि इस तरह की प्रथाएं संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन करती हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और परिवारों तथा समुदायों पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव डालती हैं।