सरकार विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की पहचान करने और उन्हें दाखिला दिलाने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू करेगी। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस कदम से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 2030 तक प्राथमिक विद्यालय से माध्यमिक स्तर तक शत प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने कहा कि आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक बाधाओं के कारण नियमित विद्यालय जाने में असमर्थ बच्चों के लिए मुक्त विद्यालय एक व्यावहारिक विकल्प है।
मंत्रालय ने बताया कि वह शिक्षा में पहुंच, गुणवत्ता और मानकीकरण को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। देश भर में दस हजार से अधिक अध्ययन और परीक्षा केंद्रों के साथ राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है जिससे सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण प्रभावित विद्यार्थियों को मुख्यधारा में लाया जा सके।
शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान विश्व का सबसे बड़ा मुक्त विद्यालय बोर्ड है। यह मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा और कौशल विकास तक समावेशी और लचीली पहुंच प्रदान करता है। इस माध्यम से सार्वभौमीकरण, समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है। यह लचीली प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा उत्तीर्ण करने के कई अवसर और मांग आधारित परीक्षा प्रणाली भी प्रदान करता है।