केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा है कि वृक्षारोपण कार्यक्रमों के तहत लगाए गए पौधों की उत्तरजीविता दर वर्तमान में लगभग 60 से 70 प्रतिशत अनुमानित है।
देश भर में वृक्षारोपण अभियानों की सफलता का आकलन करने के लिए उपग्रह इमेजिंग और जीआईएस तकनीकों के माध्यम से निगरानी की जा रही है।
राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री कीर्ति वर्धन ने कहा कि सरकार वृक्षारोपण के लिए उपग्रह आधारित आकलन और क्षेत्र सत्यापन के संयोजन का उपयोग करती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट आकलन तंत्र हर दो साल में प्रगति की समीक्षा करता है, जिससे सरकार को यह आकलन करने में मदद मिलती है कि वास्तव में कितने रोपित पौधे जीवित बचे हैं।
पर्यावरण के लिए वनों के महत्व पर एक सदस्य द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए श्री कीर्ति वर्धन ने कहा कि भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2023 के अनुसार, देश का वन और वृक्ष आवरण 8 लाख 27 हजार 357 वर्ग किलोमीटर है, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 25 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय मिशनों, राज्य स्तरीय कार्यक्रमों और अन्य वृक्षारोपण पहलों के समन्वय के माध्यम से वन क्षेत्र को और अधिक विस्तारित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
राजस्थान और अरावली भूभाग का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने ने कहा कि अरावली भूभाग बहाली और अरावली हरित दीवार पहल के तहत वृक्षारोपण और पर्यावरण बहाली गतिविधियां चलाई जा रही हैं।