सरकारी ई-मार्केटप्लेस-जैम ने 18 लाख 4 हजार करोड़ रुपये का कुल सकल व्यापार मूल्य- जीएमवी हासिल कर लिया है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 में 5 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी पार करना भी शामिल है। जैम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने नई दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 18 लाख 4 हजार करोड़ रुपये के कुल जीएमवी को पार करना एक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित खरीद प्रणाली में खरीदारों, विक्रेताओं और संस्थानों के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सरकारी संस्थाओं में बड़े पैमाने पर खरीद को सक्षम बनाने वाले एक सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में जैम की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। श्री मिहिर कुमार ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म खरीद निर्णयों को सुगम बनाता है, विभिन्न क्षेत्रों के उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़ता है और सार्वजनिक व्यय में आर्थिक समावेशन, स्थिरता तथा पारदर्शिता को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म एक पारदर्शी, सक्षम और समावेशी डिजिटल सार्वजनिक खरीद प्रणाली के रूप में विकसित हो रहा है। श्री मिहिर कुमार ने बताया कि जैम ने सूक्ष्म तथा लघु उद्यमों, महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमों और स्टार्टअप्स के लिए पहुंच बढ़ाने के लिए एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल ऑर्डरों में से 68 प्रतिशत ऑर्डर लघु और मध्यम उद्यमों द्वारा पूरे किए गए, जो कुल सकल बाजार मूल्य का 47 दशमलव एक प्रतिशत था। जैम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि प्लेटफॉर्म पर 11 लाख से अधिक लघु और मध्यम उद्यम पंजीकृत हैं और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उन्हें 23 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इसी अवधि के दौरान 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त किए हैं, जो 36 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।
जैम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि जैम के संचालन में प्रौद्योगिकी की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और निष्पक्षता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और उन्नत विश्लेषण का उपयोग करता है।